ख्वाइशों का कमरा -एक गीत
ख्वाहिशों के कमरे में एक दराज़ तेरा है, ज़िंदगी की महक लिए उसमें राज़ मेरा है। उस दराज़ में नहीं कोई भी आबसाब, मग़र बेशकीमती हैं उसमें रखे ख़्वाब, कई बरसों की नींदें बेच कर कमाया, तन्हाईयों की धुन पे, वो साज तेरा है।
Literature
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May 2026 9:17 PM
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