बलिदानी बदरी
थर्राती वो तूफ़ानों से, उसे चुभे गर्जनमय वानी, धक्के वक़्त के सह, पोषण को कर्तव्य वो मानी, गर्जनाओं और कर्तव्यों के महासमर में जूझती, वो डरी सी साँवरी बदरी, हुई ‘बेतौल’ बलिदानी।
Literature
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03
Aug
2026 7:28 PM
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